आज का पंचांग

उत्सव पंचांग - सटीक, प्रामाणिक और परंपरा में निहित

आज - 05 अप्रैल 2026

अप्रैल

05

रवि

Krishna Paksha - Tritiya

रविवार

panchang
flower

शुभ मुहूर्त

Abhijit Muhurat

6:31 AM से 7:16 AM

Amrit Kaal

1:22 AM से 3:09 AM

Brahma Muhurat

11:05 PM से 11:53 PM

flower

अशुभ मुहूर्त

Rahu Kaal

5:19 AM से 6:54 AM

Yamaganda

6:54 AM से 8:28 AM

Gulika

10:02 AM से 11:36 AM

Dur Muhurat

7:16 AM से 8:02 AM

Varjyam

6:09 AM से 7:56 AM

flower

सूर्योदय

12:37 AM

सूर्यास्त

1:11 PM

चंद्रोदय

4:24 PM

चंद्रास्त

2:07 AM

तिथि

Tritiya

04 अप्रैल 2026 4:40 am से 05 अप्रैल 2026 6:28 am

Chaturthi

05 अप्रैल 2026 6:30 am से 06 अप्रैल 2026 8:39 am

नक्षत्र

Vishakha

04 अप्रैल 2026 5:51 pm से 05 अप्रैल 2026 8:22 pm

कर्ण

Vishti

04 अप्रैल 2026 5:33 pm से 05 अप्रैल 2026 6:28 am

Bava

05 अप्रैल 2026 6:30 am से 05 अप्रैल 2026 7:32 pm

योग

Vajra

04 अप्रैल 2026 12:01 pm से 05 अप्रैल 2026 12:27 pm

Siddhi

05 अप्रैल 2026 12:29 pm से 06 अप्रैल 2026 1:11 pm

आगामी त्योहार

अप्रैल

06

विकट संकष्टी चतुर्थी

"चतुर्थी तिथि प्रारंभ – 05 अप्रैल 2026 को पूर्वाह्न 11:59 बजे चतुर्थी तिथि समाप्त – 06 अप्रैल 2026 को अपराह्न 02:10 बजे" विकट संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित होती है। यह व्रत बाधाओं से मुक्ति और सफलता के लिए किया जाता है।

अप्रैल

10

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी (वैशाख मास विशेष)

"प्रारंभ – 09 अप्रैल को रात्रि 09:19 बजे समाप्त – 10 अप्रैल को रात्रि 11:15 बजे" मासिक कृष्ण जन्माष्टमी हर माह कृष्ण पक्ष अष्टमी को मनाई जाती है। यह व्रत भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्ति के लिए किया जाता है।

अप्रैल

10

मासिक कालाष्टमी

"प्रारंभ – 09 अप्रैल को रात्रि 09:19 बजे समाप्त – 10 अप्रैल को रात्रि 11:15 बजे" मासिक कालाष्टमी भगवान भैरव की उपासना का दिन है। यह भय, नकारात्मकता और कष्टों से रक्षा करती है।

अप्रैल

13

वल्लभाचार्य जयंती

"एकादशी तिथि प्रारंभ – 13 अप्रैल 2026 को प्रातः 01:16 बजे एकादशी तिथि समाप्त – 14 अप्रैल 2026 को प्रातः 01:08 बजे" वल्लभाचार्य जयंती पुष्टिमार्ग के संस्थापक श्री वल्लभाचार्य के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है।

अप्रैल

13

वरुथिनी एकादशी

"एकादशी तिथि प्रारंभ – 13 अप्रैल 2026 को प्रातः 01:16 बजे एकादशी तिथि समाप्त – 14 अप्रैल 2026 को प्रातः 01:08 बजे" वरुथिनी एकादशी पापों से मुक्ति और पुण्य प्राप्ति के लिए व्रत की जाती है। यह विष्णु भक्ति का विशेष दिन है।

अप्रैल

14

मेष संक्रांति

मेष संक्रांति सूर्य के मेष राशि में प्रवेश का पर्व है। यह नए सौर वर्ष की शुरुआत मानी जाती है।

अप्रैल

14

कृष्ण वामन द्वादशी

"द्वादशी तिथि प्रारंभ – 14 अप्रैल 2026 को प्रातः 01:08 बजे द्वादशी तिथि समाप्त – 15 अप्रैल 2026 को रात्रि 12:12 बजे" कृष्ण वामन द्वादशी भगवान विष्णु के वामन अवतार को समर्पित है। यह दिन दान और संयम का संदेश देता है।

अप्रैल

14

बुध प्रदोष व्रत

"त्रयोदशी तिथि प्रारंभ – 15 अप्रैल 2026 को रात्रि 12:12 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त – 15 अप्रैल 2026 को रात्रि 10:31 बजे" बुध प्रदोष व्रत बुधवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत है। यह शिव कृपा और बुद्धि वृद्धि के लिए किया जाता है।

अप्रैल

15

कुब्जिका जयंती

"त्रयोदशी तिथि प्रारंभ – 15 अप्रैल 2026 को रात्रि 12:12 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त – 15 अप्रैल 2026 को रात्रि 10:31 बजे" कुब्जिका जयंती देवी कुब्जिका की उपासना का पर्व है। यह तांत्रिक परंपराओं में विशेष महत्व रखती है।

अप्रैल

16

मासिक शिवरात्रि (वैशाख मास विशेष)

"प्रारंभ – 15 अप्रैल को रात्रि 10:31 बजे समाप्त – 16 अप्रैल को सायं 08:11 बजे" मासिक शिवरात्रि भगवान शिव की विशेष आराधना का दिन है। यह आत्मशुद्धि और शिव कृपा का अवसर देती है।


आगामी पूजा

 Adi Kaal Vishesh Karma Shuddhi Bhairav Panchopchar Puja & Bhairav Asthakam Path  - Utsav Puja

Puja for Stability & Mental Clarity

Adi Kaal Vishesh Karma Shuddhi Bhairav Panchopchar Puja & Bhairav Asthakam Path

आदि काल भैरव, Varanasi

रवि - 05 अप्रैल 2026 - रविवर विशेष

1.0k+ भक्त

पूजा करें
Maa Chinnamasta Batuk Bhairav Maha Kaal Ratri Rahu Jagran Tantrik Havan Anusthan - Utsav Puja

To Activate Rahu and invite immense wealth

Maa Chinnamasta Batuk Bhairav Maha Kaal Ratri Rahu Jagran Tantrik Havan Anusthan

बटुक भैरव और चिंतपूर्णी, Ujjain

रवि - 05 अप्रैल 2026 - रविवर विशेष

1.0k+ भक्त

पूजा करें
Panchgrahi Rajyog Prapti 23,000 Mool Mantra Jaap aur Tel-Til Daan Anushthan - Utsav Puja

Puja for Rare 5-Planet Rajyog for Wealth and Career Growth.

Panchgrahi Rajyog Prapti 23,000 Mool Mantra Jaap aur Tel-Til Daan Anushthan

नवग्रह शनि मंदिर, Ujjain

रवि - 05 अप्रैल 2026 - रविवर विशेष

1.0k+ भक्त

पूजा करें
Ravivar Vishesh 10,000 Surya Mool Mantra Jaap - Utsav Puja

Strengthen Surya Graha for radiant health, career success, leadership, and removal of obstacles.

Ravivar Vishesh 10,000 Surya Mool Mantra Jaap

सूर्य मंदिर, Varanasi

रवि - 05 अप्रैल 2026 - रविवर विशेष

1.0k+ भक्त

पूजा करें
Sarvartha Siddhi Yog Visesh 10,000 Surya Mool Mantra Jaap - Utsav Puja

🔴 Puja for For Authority, Career Success, Confidence Boost

Sarvartha Siddhi Yog Visesh 10,000 Surya Mool Mantra Jaap

सूर्य मंदिर, Varanasi

रवि - 05 अप्रैल 2026 - रविवर विशेष

1.0k+ भक्त

पूजा करें
Surya Gochar Visesh 19,000 Surya Astakam Path - Meen Sankranti - Utsav Puja

🔴 Puja for clear mind & right decisions

Surya Gochar Visesh 19,000 Surya Astakam Path - Meen Sankranti

सूर्य मंदिर, Varanasi

रवि - 05 अप्रैल 2026 - रविवर विशेष

1.0k+ भक्त

पूजा करें
टीम उत्सव - आंतरिक परीक्षण - Utsav Puja

समृद्धि, सुरक्षा, आध्यात्मिक मुक्ति और मनोकामना पूर्ति के लिए भगवान जगन्नाथ की असीम कृपा प्राप्त करें।

टीम उत्सव - आंतरिक परीक्षण

श्री खाटू श्याम मंदिर, Ujjain

रवि - 05 अप्रैल 2026 - रविवर विशेष

4.5k+ भक्त

पूजा करें
पौष दर्श अमावस्या विशेष 23000 शनि मूल मंत्र जाप एवं भद्र काली तांत्रिक हवन - Utsav Puja

कर्म ऋण को दूर करने और जीवन की बाधाओं को हल करने के लिए मूलांक 4, 7 और 8 की पूजा।

पौष दर्श अमावस्या विशेष 23000 शनि मूल मंत्र जाप एवं भद्र काली तांत्रिक हवन

सूर्य मंदिर, Varanasi

रवि - 05 अप्रैल 2026 - रविवर विशेष

2.3k+ भक्त

पूजा करें
बुधवार विशेष 21000 राहु बीज मंत्र जाप एवं मां चिंतपूर्णी विशेष राहु शांति महा अनुष्ठान - Utsav Puja

राहु शांति के लिए पूजा

बुधवार विशेष 21000 राहु बीज मंत्र जाप एवं मां चिंतपूर्णी विशेष राहु शांति महा अनुष्ठान

राहु पैठानी मंदिर, Paithani

रवि - 05 अप्रैल 2026 - रविवर विशेष

1.0k+ भक्त

पूजा करें
माता चिंतपूर्णी शक्ति पीठ-राहु शांति महाचंडी पाठ एवं हवन - Utsav Puja

कुंडली से राहु का प्रभाव दूर करने के लिए पूजा

माता चिंतपूर्णी शक्ति पीठ-राहु शांति महाचंडी पाठ एवं हवन

चिंतापूर्णी मंदिर, Kangra

रवि - 05 अप्रैल 2026 - रविवर विशेष

6.6k+ भक्त

पूजा करें

उत्सव ऑनलाइन पंचांग - आपका प्रमाणिक वैदिक कैलेंडर

उत्सव पंचांग एक परिष्कृत हिंदू कैलेंडर है जिसका उपयोग वैदिक समयपालन के लिए किया जाता है। यह केवल एक तिथि ट्रैकर नहीं है, बल्कि पंचांग एक विशेष खगोलीय गणना प्रणाली के रूप में कार्य करता है, जिसे दिन के चक्र के भीतर सबसे अनुकूल (शुभ) और प्रतिकूल (अशुभ) क्षणों को प्रकट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

संस्कृत शब्द ‘पंचांगम’ का अर्थ है ‘पाँच अंग’ (पंच = पाँच, अंग = भाग)। यह प्राचीन उपकरण ज्योतिषियों और आध्यात्मिक साधकों के लिए अत्यंत आवश्यक है, जो अपनी दैनिक गतिविधियों को ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ संरेखित करना चाहते हैं। सूर्य और चंद्रमा की स्थितियों को ट्रैक करके, पंचांग केवल सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त तक सीमित न रहते हुए उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण खगोलीय जानकारी प्रदान करता है।

भौगोलिक सटीकता: स्थान क्यों मायने रखता है

पंचांग पृथ्वी पर किसी विशिष्ट स्थान के सापेक्ष खगोलीय स्थितियों पर आधारित होकर कार्य करता है। परिणामस्वरूप, इसका विवरण केवल उसी भौगोलिक क्षेत्र के लिए सटीक होता है, जिसके लिए इसकी गणना की जाती है। उत्सव पंचांग आपके वर्तमान शहर के निर्देशांकों का उपयोग करके गतिशील रूप से उत्पन्न होता है, जिससे महत्वपूर्ण समयों के लिए उच्चतम सटीकता सुनिश्चित की जा सके। सभी ज्योतिषीय अवधियों की शुरुआत और समाप्ति सीधे स्थानीय क्षितिज और सौर चक्र से जुड़ी होती है।

पंचांग के पाँच आवश्यक अंग

दैनिक पंचांग का आधार पाँच मुख्य खगोलीय घटकों पर टिका होता है:

  • तिथि (Lunar Day): यह सूर्य और चंद्रमा के बीच कोणीय अंतर को मापती है। यह सभी हिंदू त्योहारों और उपवासों की तिथियाँ निर्धारित करने का प्राथमिक कारक है।
  • नक्षत्र (Star Constellation): यह राशि चक्र के 27 निश्चित नक्षत्रों में से किसी एक में चंद्रमा की स्थिति द्वारा निर्धारित किया जाता है। इसका उपयोग नामकरण जैसे संस्कारों और अनुकूलता के आकलन के लिए किया जाता है।
  • वार (Weekday): यह एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की समयावधि होती है, जिस पर सात ग्रहों में से एक का शासन होता है।
  • योग (Union): सूर्य और चंद्रमा के संयुक्त देशांतर से उत्पन्न 27 योग होते हैं, जो दिन के समग्र स्वभाव और प्रभाव को दर्शाते हैं।
  • करण (Half-Tithi): यह एक तिथि का आधा भाग होता है। ग्यारह करणों में से विशेष रूप से विष्टि करण से बचने पर जोर दिया जाता है, जिसे नई शुरुआत के लिए अत्यंत अशुभ माना जाता है।
शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

पाँच प्रमुख पंचांग तत्वों को आकाशीय समयों के साथ जोड़कर निम्नलिखित विशिष्ट मुहूर्त निर्धारित किए जाते हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: यह अत्यंत पवित्र समय भोर से पहले होता है और ध्यान, साधना तथा अध्ययन प्रारंभ करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
  • संध्या काल (प्रातः, मध्याह्न, सायाह्न): ये दिन के तीन निर्धारित काल होते हैं, जिनमें हिंदू धर्म के अनुयायी पारंपरिक रूप से अपनी दैनिक धार्मिक प्रार्थनाएँ और अनुष्ठान करते हैं।
  • अभिजीत मुहूर्त: यह दोपहर के आसपास का स्वाभाविक रूप से अनुकूल समय होता है। यदि कोई अन्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हो, तो यह अवधि महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने के लिए एक शक्तिशाली विकल्प के रूप में कार्य करती है।
  • विजय मुहूर्त: यात्रा प्रारंभ करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाने वाला यह समय सफलता और उद्देश्य की प्राप्ति की संभावना को बढ़ाता है।
  • राहु काल: यह प्रत्येक दिन की एक विशिष्ट अशुभ अवधि होती है, जिसमें किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से पूरी तरह बचना चाहिए।
  • संकल्प: किसी भी औपचारिक पूजा का एक अभिन्न अंग, जिसमें समय और स्थान को स्थापित करने हेतु पंचांग के पाँचों अंगों तथा प्रमुख ग्रह स्थितियों (विशेष रूप से सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति) का उच्चारण किया जाता है।

उत्सव पंचांग का दैनिक संदर्भ लेकर, आप नकारात्मक ग्रह प्रभावों को कम करते हुए तथा समृद्धि और आध्यात्मिक विकास के अवसरों को अधिकतम करते हुए अपने दिन की रणनीतिक योजना बना सकते हैं।

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न